Naman Sardool Sikandar

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We lost to Covid 19 yesterday (24 February, 2021) Sikandar of Punjabi music industry S. Sardool Sikandar ji at the age of 60. Sat Sat Naman! Hope Almighty grant Solace to departed Soul and strength to bereaved family, his fans and the country as whole to bear this great loss. Sharing a “Tribute to Sardool Sikandar” by Saga Music. Your music will live for ever in the hearts of your admirers!

मेरी अच्छी माँ

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दोस्तों, यह कहानी  है एक माँ की , लेकिन उससे पहले मैं दो बातें कहना चाहता हूँ , वैसे तो बहुत ही छोटा सा शब्द है ‘माँ’… पर इस शब्द  के मायने बड़े है …इसमें… स्नेह हैं,  ममता है  …भावनाये है और शक्ति भी निहित है। ईश्वर की सबसे शानदार और खुबसूरत  रचना है माँ. […]

मेरी अच्छी माँ

Thought for the Day 52/2021

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“When I wake up in the morning, I know that it’s going to be the best day of my life. I never think about what I can’t do. Make sure positive thoughts are the first ones you think in the morning. And never procrastinate.”
― Tao Porchon-Lynch

We remember Padma Shri Tao Porchon Lynch on her first Death Anniversary. She was the oldest Yoga Teacher of the World as per Guinness Books World Records 2012. How Yoga can help some one to have Ageless Body and Timeless Mind, she was a perfect example. Hope we all will strive to live longer as well live healthy.

With lots of Positive Healing Energy for you and your family members🙌🙌🙌🙌🙌🙌🙌🙌🙌🙌

कदंब का पेड़

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यह कदंब का पेड़ अगर माँ होता यमुना तीरे।
मैं भी उस पर बैठ कन्हैया बनता धीरे-धीरे।।

ले देतीं यदि मुझे बांसुरी तुम दो पैसे वाली।
किसी तरह नीची हो जाती यह कदंब की डाली।।

तुम्हें नहीं कुछ कहता पर मैं चुपके-चुपके आता।
उस नीची डाली से अम्मा ऊँचे पर चढ़ जाता।।

वहीं बैठ फिर बड़े मजे से मैं बांसुरी बजाता।
अम्मा-अम्मा कह वंशी के स्वर में तुम्हे बुलाता।।

बहुत बुलाने पर भी माँ जब नहीं उतर कर आता।
माँ, तब माँ का हृदय तुम्हारा बहुत विकल हो जाता।।

तुम आँचल फैला कर अम्मां वहीं पेड़ के नीचे।
ईश्वर से कुछ विनती करतीं बैठी आँखें मीचे।।

तुम्हें ध्यान में लगी देख मैं धीरे-धीरे आता।
और तुम्हारे फैले आँचल के नीचे छिप जाता।।

तुम घबरा कर आँख खोलतीं, पर माँ खुश हो जाती।
जब अपने मुन्ना राजा को गोदी में ही पातीं।।

इसी तरह कुछ खेला करते हम-तुम धीरे-धीरे।
यह कदंब का पेड़ अगर माँ होता यमुना तीरे।।

***आज शुभद्रा कुमारी चौहान जी की पुन्यतिथि पर उनकी लिखी कविता के माध्यम से उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए।🎉🎉🎉 कदंब का वृक्ष महाविद्यालय प्रांगण में!